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Tuesday, 26 January 2021

Veerangna Ki Awaaz

 




VibzContentCart wishes everyone a very Happy Republic Day!

वीरांगना की आवाज़ 

हम क्या शिकवा करे, क्या मन्नत करें उनसे

जो किसी और पर मर मिटे है

वह सर्दी और धुप को ओढ़ते है 

यहाँ हम सालो के इंतज़ार सेकते  है। 


होली दिवाली सब चिठ्ठी-तारी में मनाई,

अंगना अब थक गए है मेरे

बिछोना सूनेपन का शाम सवेरे 

न थकूँगी पर मैं. ......... क्यूंकि;

उस अंगने में आशा की लौ जलाई है। 


वोह  केहते है की एक दिन ज़रूर आऊंगा,

औरो की तरह तुम्हे शहर दिखाऊंगा।

जानते है की ये बस कहने की बात है 

किसी की सेवा में वह दिन रात समर्पित है। 


शिकवा नहीं पर उनपर नाज़ है मुझे,

जो उनकी सेवा छोड़ दे, ऐतराज़ है मुझे 

तुम दुश्मनो को धुल छठा के आना,

अपने पहले प्यार का फ़र्ज़ निभाना। 


अंगना फिर भी गूंजेगा तुम्हारी ललकार से 

स्वागत होगा तुम्हारा विजयी फनकार से 

सर उठा के घूमेगी ये वीरांगना, देखेगी नज़ारे 

भर जाएंगे सारे ज़ख्म मेरे।।


जयहिंद 


विभा सिंघानिया  गुप्ता 






Friday, 27 November 2020

मेरी धड़कन

 




मेरी धड़कन

केहते है सब की
एक ही दिल, एक ही धड़कन
उसका कोई बटवारा नहीं होता है
ज़रा कोई उसका चेहरा देखके बोलो
क्या कोई ऐसी नदी है
जिसका कोई किनारा नहीं होता है?

वो एक लम्हा था
ईश्वर ने जब मुझसे कहा था
अब समय आया है उसके जनम का
दिल से दिल का एक टुकड़ा अलग होने का
रहेगा तुम्हारा ही अंश वो
धड़कन एक और एक ही दिल के हिस्से दो

बड़े होते बस देखु उसे 
प्यार करू कभी डाँटू उसे 
मुस्कुराहट उसकी अल्हड और नादान 
खिलता चेहरा उसका मेरी जान 
उसके मुँह से 'माँ' का कथन 
जैसे हो मेरी दिल की धड़कन 

बना रहे वह मेरी परछाई 
उसी में है मेरी दुनिया समायी 
कभी न कभी तो कहेगा अपनी माँ को 
अब मुझे अपनी ज़िन्दगी जीने दो 
दर्द होगा मुझे..... पर रोकूंगी न उसे 
चलती तोह रहेगी धड़कन और सांसें 
एक यहाँ और एक वहाँ  , एक ही दिल के दो हिस्से 

जानती हु अब फिर ईश्वर कहेंगे 
वादा अपना पूरा करने को कहेंगे 
कब तक होंगे एक ही दिल के हिस्से दो... 
कब तक होगी एक ही धड़कन 
बोहोत देख लिया उस खेलते जीव को 
अब वह संभालेगा अपनी नीव को 
वक़्त आ गया है तुम्हारे जाने का 
दे दो उसे तुम अपना पूरा दिल 
अपनी साँसैं और बटीं हुई धड़कन। 

- एक 'माँ'









Sunday, 1 November 2020

शहतूत का पेड़ (Shehtoot Ka Ped) / A Poem On Mulberry Tree

 

क्या आपने कभी शहतूत खाया है? ये तो जैसे हमारे बचपन का अभिन्न हिस्सा है. कुछ ऐसी ही यादें ताज़ा करने के लिए और उस खट्टे मीठे स्वाद को दुबारा ज़ुबान  पर लाने के लिए विब्ज कंटेंट कार्ट की तरफ से मैं 'शमौना सैमुएल '  का आभार व्यक्त करती हु।  उम्मीद है आपको उनकी ये प्रस्तुति बोहोत पसंद आएगी. अपने कमैंट्स ज़रूर से शेयर करे।  


शहतूत का पेड़ 

शमौना सैम्युएल 


याद है तुम्हें वो शहतूत का पेड़ बड़ा, 
जो हमारी गली के बीच में था खड़ा, 
उसके आगे जाने की इजाज़त नहीं थी, 
हमारी हद वहीं तक सिमटी थी। 

जब उसमें शहतूत आते, तो मेला सा लगा रहता था, 
उसके नीचे, बच्चों का रेला सा लगा रहता था, 
ऊपर चढ़ने का किसी का साहस नहीं होता था, 
उन्हीं से गुज़ारा करते, जो नीचे पड़ा होता था। 

जिस दिन कोई भईया या अंकल पेड़ पर चढ़ जाते, 
हम भी झोली फैला कर नीचे खड़े हो जाते, 
सबके घरों में उस दिन शहतूत की दावत होती, 
कौन कितना खाएगा, माँ - बाप की आफत होती। 


जिसने सबसे ज़्यादा शहतूत लपके, वो ज़्यादा खाएगा, 
जो सबसे छोटा है, वो रो रोके घर सर पर उठाएगा, 
धोकर खाने हैं या नहीं, ये सबकी मरज़ी होती थी, 
कल दुबारा आना है ये बात पक्की होती थी।  

अब न वो शहतूत हैं, न बच्चों का रेला है, 
जाने कौन कहाँ है, खड़ा वो पेड़ अकेला है, 
मन तो करता है कि एक दिन जाएं सब, 
उस पेड़ का शुक्रिया अदा भी करें, 
और उसको गले लगाए हम, 

बचपन में बहुत साथ दिया था उसने, 
मुफ्त में शहतूत खाने का सुख जो दिया था उसने
अब याद करते है उस मीठे स्वाद को 
बचपन में सिमटे शहतूत के पेड़ को। 

धन्यवाद 

Wednesday, 28 October 2020

Wishes - My Secret Friend

 





WISHES

There are times when my mind and heart,
Sweep away to the Tinsel Town,
Exploring the world around...
With their own eyes and feelings.

Me the soul, in between all of them,
Like the blue water and busy fishes..
Close my eyes to see my inner world,
And have a date with my wishes.

Like the magic red carpet,
My wishes fly me on cloud nine;
A moment of teenage blush,
A  moment of carefree smile,
Aren't they best friend of mind?

The skin might have withered,
And my joints complain, but not my wishes;
They are still young and beautiful,
To keep me alive, it is not just blood,
Life thrives when wishes are the fuel.

Tell me almighty, how long is my stay,
On this soil, making hay
I want to live up to my wishes
Before my breaths give away.

Promise me, God, that I will get time
To dance in the rain and smile,
To meet the soul and say goodbye;
To be the woman who doesn't shy. 

Who doesn't has to ask the world,
If she can fulfill her wishes?
She is finally living them all...
Before the 'unknown' she gets lost in ashes.

VIBHA GUPTA



 

 

 

 

 

 

 

 

 


Saturday, 17 October 2020

'Meri Biwi'- Fursat ke Khayal

 



Hindi Poetry on Wife



मेरी बीवी 

वोह अनोखी वोह अद्भुत वोह चंचल 

नहीं बना पायेगा जिसका कोई cv 

इकलौती  वोह, मेरी दुनिया वोह 

कुछ ऐसी ही है जी 'मेरी बीवी' 


सुबह चाय के पतीले से बात करती 

कहती उससे जल्दी बन जाना 

नाश्ता टिफ़िन सब का बनाके 

मुझे भी तोह है दफ्तर जाना 

'टाइम्स ऑफ़ इंडिया' क्या पढू जी 

खबरों से भरा वह चलता फिरता  tv 

कुछ ऐसी ही है जी 'मेरी बीवी' 


पार्टी में उन्हें जाना हो जब 

कपड़ो की कंगाली याद आये तब 

"क्या पह्नु जी कुछ समझ नहीं आ रहा 

पुराना  फैशन अब नहीं भा रहा"

तैयार वह हो, तोह सो जाती घडी 

कुछ ऐसी ही है जी 'मेरी बीवी' 


बच्चे की जो परीक्षा आये 

सर पर शिकन उनके भमराये 

बुखार उनका हम पल-पल नापे 

विस्फोट की गूँज से थर-थर काँपे 

परीक्षा नहीं है ये विपदा बड़ी 

कुछ ऐसी ही है जी 'मेरी बीवी' 


चिल्लाती भी वोह , सुनती भी वोह 

किचन में भी वोह, दफ्तर में भी वोह 

मायके तोह हसी ख़ुशी भेज देता 

पर ध्यान तोह वही रखती सबका 

मन न लगे और दिन बन जाए सजा कड़ी 

कुछ ऐसी ही है जी 'मेरी बीवी' 


अरे खुशकिस्मत हु जो उन्हें पाया 

हमसफ़र में ही दोस्त को पाया 

हां, कभी कभी वह बिगड़ जाती है 

जैसे मोटर कोई ख़राब हो जाती है 

जो न आता हमें उनको मानना 

पकवानो के तारीफ के पुल बांधना 

तोह खाते संडे को सिर्फ सलाद ककड़ी 

कुछ ऐसी ही है  जी 'मेरी बीवी'

 

उनके बारे में सुना आपने, आभार 

उन्ही से तोह रोशन है मेरा यह संसार 

कुछ खट्टी, कुछ मीठी इस कवी की आपबीती 

विदा लेता हु आपसे अब, बुला रही वोह  अब 

गरम चाय की प्याली और बातों की लड़ी 

कुछ ऐसी ही है जी   बीवी 'मेरी बीवी'


'नाम गुमनाम ही रहे तोह अच्छा है'




 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

Tuesday, 29 September 2020

Vibha Ke Alfaaz-II

 

Traveling Back to Our Childhood...

कही सुबह का गड-गड कुल्ला 

कही चूड़ी की मीठी खनखन 

कहा गयी वह आवाज़ें 

कहा गया मेरा बचपन?


कंधो पर रहता था बस 

मस्ती से भरा एक बस्ता 

पत्थर के साथ फुटबॉल खेलते 

निकल जाता था पूरा रस्ता 

 घर पहुँचते तोह रोटी की खुशबु 

दिलो-दिमाग को खुश कर देती 

पिता 'नंबर' पूछे उससे पहले 

माँ भरपेट खाना खिलाती 


क़यामत से कितना भी मांगो 

नंबर क्यों आते थे कम?

'बापू को तुम शांत रखना'

कहके माँ को लगते मख्खन 

'बड़े होकर तुम क्या बनोगे?'

होती पिता से यही अनबन 

कहा गयी वह आवाज़ें 

कहा गया मेरा बचपन?


बगल वाली आंटी के घर 

दीवाल कूद कूद कर जाते 

वाह वाह आंटी वाह वाह आंटी कहके 

नए नए पकवान बनवाते 

'चल बदमाश' कहती वह हस के 

खुश होती पर मन ही मन 

कहा गयी वह आवाज़ें 

कहा गया मेरा बचपन?


कभी हेलीकाप्टर कभी लूडो 

तोह कभी ले आते पापा फौजी की गन 

खिलोने से तोह भर जाती टोकरी 

नहीं भरता पर हमारा मन 

सब मिलकर  जाते थे  पिकनिक 

कभी चाट पकोड़ी कभी गार्डन 

अंताक्षरी की महफ़िल लगती 

कभी रम जाते थे भजन 

कहा गयी वह आवाज़ें 

कहा गया मेरा बचपन?


राह देखा करते थे की 

कब आएगी उजली दिवाली 

पापा लाते नए कपडे और पटाखे 

माँ बनाती पेठा और सुहाली 

चहचहाते हुए घर में 

साथ करते पूजा हवन 

कहा गयी वह आवाज़ें 

कहा गया मेरा बचपन?


दादा दादी का लाड था घर में 

सब करते उनको नमन 

मिलकर देखा करते थे संडे की संडे 

महाभारत और रामायण 

 घर का एक सदस्य जो  न भूला 

मेरे आँगन को वह झूला 

सररर सररर जब उचे जाए 

बढ़ जाती माँ की धड़कन  

कहा गयी वह आवाज़ें 

कहा गया मेरा बचपन?


बर्थडे पर होती थी मनुहार 

मिलते थे बोहोत उपहार 

दोस्ती की टोली साथ झूमती गाती 

इठलाते हम यु बनठन 

कहा गयी वह आवाज़ें 

कहा गया मेरा बचपन?


संक्रांति की बात कुछ और 

चाचू लाते पतंग और डोर 

पहुंच जाते छत पर तड़के भोर 

रंग बिरंगी अँखियाँ चारो ओर 

'काई -पो-छे !' की गडगडाहट से 

गूँज उठता था ये गगन 

कहा गयी वह आवाज़ें

 कहा गया मेरा बचपन?


न होता तब मोबाइल 

न होता फेसबुक पे प्रोफाइल 

फिर भी रहती हमेशा 

चेहरे पर प्यारी सी स्माइल 

सस्ती सुन्दर टिकाऊ ज़िन्दगी 

न था ये झमेला कभी 

अरे..... 'वन टू का फोर , फोर टू  का वन '

कहा गयी वह आवाज़ें 

कहा गया मेरा बचपन?

'विभा'

स्पेशल थैंक्स टू योगेश सिंघानिया 




Saturday, 29 August 2020

To Speak is to Let My Voice

 



To speak is  to let my voice
To let my heart, dictate my words;
And tell the difference,
Between wrong and right.
To speak is to let my voice. 


To speak is to let my voice
For whom, I really care;
You may feel it's an objection,
But it is your well-wisher's dare.
To speak is to let my voice. 


To speak is to let my voice
Hey...don't be judgemental!
Yes. I have to be responsible;
But, why only me the 'soul - perfect'?
Don't I have my own self - respect?
To speak is to let my voice.

To speak is to let my voice
If I don't speak, many others will speak;
Words get tossed; truth gets weak,
Don't turn your conscience into a noise
To speak is to let my voice.


Vibha Gupta

Friday, 28 August 2020

Did You Find Your MOJO Moment?





Sitting in the corner with empty eyes,

Letting my desires ferment...

Give up home & feel the undesirable despair,

Did life showed up with such an agreement..??


If no..then what is stopping you!

Privileged to bear daily torment ??

Work out the fears, begin the quest of calm,

For that is why YOU are God Sent!


A penny in the pocket, a cookie in the bag,

Mini surprises that made you mad...

Sitting empty today in the middle of luxury,

What you have....What you had.


Let your smile be the sword,

Make every evil bruised and bent,

Find! Meet! Talk! Shout...Connect!

Let's dance to the tune of MOJO Moment!


The oldies, the buddies, the best of friends,

The careless smiles came and went. 

Hey....can you open the forbidden book again....?

Yellowish Hue & that odor of nostalgia...Ummm.

Tickles your heart...

With .....a MOJO Moment!


Loosen yourself, laugh at yourself,

A short break is good from the daily rant!

Its time to bring the penny & cookie back in the pocket,

For that is your MOJO moment!


- Vibha Gupta





 

Saturday, 15 August 2020

My Bow to Pillars of Security



VibzContentCart wishes its all readers a 


The celebration is incomplete without paying tribute to our soldiers, who are at the frontier, determined to protect our country. A short tribute to those...ready to die so that we can live.....


Standing tall and at the front,

To bear every first evil brunt…

Vigilance is like your heartbeat,

Ready to battle and achieve the feat.

To the sons and daughters of the country…

My bow to the pillars of security...

 

You find your abode away from home,

In deep waters, rough terrains and blue sky

Valour and discipline in your every nerve,

Defensive and fearless, when eye to eye.

To the epitome of bravery and integrity...

My bow to the pillars of security.

 

Every new day, every new sunrise,

May just turn out to be the day of sacrifice.

But...you still wear that smile and pride,

Embracing battles and uncertain tides.

Love for nation is your only identity,

My bow to the pillars of security.

 

Homecoming in ages, is a new life,

Which perhaps would none of us realise,

Unending moments with family, not so common,

Gives up everything, hearing motherlands summon.

Born to die for the sake of nation’s safety,

My bow to the pillars of security.

 

When on borders, the diversity fades

Laughing and crying along with comrades

Destroying every obstruction that comes in way

‘That’s how we live!” the bravoes say.

Celebrating the true spirit of daredevil unity...

My bows to the pillars of security.

 

-        Vibha Gupta

 

We salute you!!!!

Jai hind






 

Saturday, 27 June 2020

Vibha ke Alfaaz - I



Welcome to the Jazbaat - Shayari and Poem Section of WhisperingWoods. Shayari and Poems simple convey the artistic bend of words soaked in emotions and thoughts. They don't have a fixed path....they just flow...straight from the heart....
Feel free to comment or review them. Want to contribute? Reach out to us in the comment section. We would love to feature you and showcase your 'jazbaat' here.

🌺🌺

Muskurahat kisi ki jaagir nahi hoti....
Rone ki fitrat har kisi ki nahi hoti.
Kab tak jamate rahoge ye shikayaton ki mehfil..
Kab tak jamate rahoge ye shikayaton ki mehfil..
Khul kar jee lene ki parwangi nahi hoti.
Par bhool na jaana tum bhi insaan ho...
Kisi ke liye afsos toh kisi ke liye meherban ho.
Hasne aur rone ka tana baana chalta rahega...
Zindagi sir par utha rakhi hai...

Ye toh yu hi chalta rahega ...chalta rahega.



🌺🌺


Muddatein ho gayi...

jaise guzar gaya ho zamana...

Dekha toh tumhe roz karte they, 

par shayad ab tumhe jaana.


Ye baatein aise hi satati rahengi,

 puraani yaadein humein jalati rahengi,
Kuch yaad karke ashq beh na nikle,

 kuch behtar hai yaad na kare warna chubhengi. 


Ab toh woh hi hai jo khairiyat puche, 

kab khatam ho ye "vibha" soche..
Mandir mein bus jise sajaa ke rakh diya, 

hua tumhe ehsaas..jab khud ko bandh kiya. 


Jala do aaj ek diya...lambi fursaton mein..

Kahi toh meherbaan hoga woh tumhari harkarton pe.....
tumhari harkaton pe .......



🌺🌺

Nar ho ya naari hai....ye vipda toh sab pe bhaari hai...
Koshishein bhi jaari hai, mukhote mein duniya saari hai..

'Door raho' yeh kehna...ab aasaan ho gaya..
Chup kar apne aap se hi milna...haalaton ka farmaan ban gaya..

Woh aaine ko dekhna, woh tayyar hokar itra chidakna..
Rozana ka ye drama...ab yaadon ka mohtaj ho gaya..

Dekh rahi hai 'vibha' auro ki tarah..is pure falsafe ko...
Dhundh rahi hai khali basti mein kisi apne ko....kisi apne ko..

🌺🌺

Aankhon mein aansu aur sama hai gamgeen...
Guftagu kya kare, ab shaam kaha haseen.

Uljhano ko suljhate hue nikal jayenge din..
Ab tak toh reh rahe they, thoda aur rehlenge unke bin.

🌺🌺

Hari bhari hai ye roshan wadiyaan...
In waadiyon ki chuppi kuch..
keh rahi hai..
Dhoop mein nahake, apna ujla rang, 
Itra ke jaise bikher rahi hai. 

Inki khubsoorti ka kya kehna,
Ye toh inka haq hai..
Rahe humesha aabad aise hi..
Ye na ho toh jeevan narak hai.

Ae waadiyon.. bus yu sama lo mujhe..
Ki odh lu tumhe,
Aur ban jaaye 'Vibha' tumhari is tarah..
Ki kabhi na bhool paye ye lamhe. 

🌺🌺

Yaado ka Falsafa Baarish ki boondein hai ya yaadon ka falsafa, Bhini mitti ki khushbu, kya raaz hai chupa.. Yaad aayi tumhari jab baadal chaaye.. Baarish hui ...dharti ko pyaar mila Aur main dekhti rahi jharokhe se... Yaado ka falsafa boondo mein simat jaaye Kabhi toh aaoge is baarish ki tarah Surk labon ko hasne ki mil jayegi wajah Jo na aaye .. To dekhti rahungi jharokhe se yu hi.. Ye boondein aur yaadon ka falsafa Baarish toh aayegi aur tham jayegi, Aankhen aur zameen nam ho jayegi...
 
Guzar na jaaye ye mausam jharokhe se hi .. Bheegne ka mauka mil jaye mujhe bhi... Aa jaao ki taak rahi hu rasta tumhara... Shayad na milu agle saal.... Jharokhe pe dobaara.... Mil jaungi mitti mein...tumhare intzar mein.. Tum le aana baarish mere pyar mein.. Mehsus karna mujhe us.... bhini mitti ki khusbu mein... Ban jaungi ye barish ka farmaan Aur tumhari yaadon ka falsafa...

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Patjhad Ka Mausam

Jab din guzarte hai jaise koi patjhad ka mausam, Shaakh ho jaaye bezubaan, aankhen rahe num Padhne lagte hai hum haatho ki woh lakeer Jaise inme hi ho saare chupe raaz aur taqdeer
Intzaar rehta hai ki khatm ho jaaye ye patjhad

Bhar jaaye in bejaan adhoore shaakh ka daaman Phir se guzre haseen lamho se bhara din, Saansein sirf chale na, dobara jeene lage hum. Jeene lage hum. Khatm ho jaaye ye patjhad ka mausam...

🌺🌺



     

                
                  











Veerangna Ki Awaaz

  VibzContentCart wishes everyone a very Happy Republic Day! वीरांगना की आवाज़  हम क्या शिकवा करे, क्या मन्नत करें उनसे जो किसी और पर मर मिटे...