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Friday, 27 November 2020

मेरी धड़कन

 




मेरी धड़कन

केहते है सब की
एक ही दिल, एक ही धड़कन
उसका कोई बटवारा नहीं होता है
ज़रा कोई उसका चेहरा देखके बोलो
क्या कोई ऐसी नदी है
जिसका कोई किनारा नहीं होता है?

वो एक लम्हा था
ईश्वर ने जब मुझसे कहा था
अब समय आया है उसके जनम का
दिल से दिल का एक टुकड़ा अलग होने का
रहेगा तुम्हारा ही अंश वो
धड़कन एक और एक ही दिल के हिस्से दो

बड़े होते बस देखु उसे 
प्यार करू कभी डाँटू उसे 
मुस्कुराहट उसकी अल्हड और नादान 
खिलता चेहरा उसका मेरी जान 
उसके मुँह से 'माँ' का कथन 
जैसे हो मेरी दिल की धड़कन 

बना रहे वह मेरी परछाई 
उसी में है मेरी दुनिया समायी 
कभी न कभी तो कहेगा अपनी माँ को 
अब मुझे अपनी ज़िन्दगी जीने दो 
दर्द होगा मुझे..... पर रोकूंगी न उसे 
चलती तोह रहेगी धड़कन और सांसें 
एक यहाँ और एक वहाँ  , एक ही दिल के दो हिस्से 

जानती हु अब फिर ईश्वर कहेंगे 
वादा अपना पूरा करने को कहेंगे 
कब तक होंगे एक ही दिल के हिस्से दो... 
कब तक होगी एक ही धड़कन 
बोहोत देख लिया उस खेलते जीव को 
अब वह संभालेगा अपनी नीव को 
वक़्त आ गया है तुम्हारे जाने का 
दे दो उसे तुम अपना पूरा दिल 
अपनी साँसैं और बटीं हुई धड़कन। 

- एक 'माँ'









Saturday, 17 October 2020

'Meri Biwi'- Fursat ke Khayal

 



Hindi Poetry on Wife



मेरी बीवी 

वोह अनोखी वोह अद्भुत वोह चंचल 

नहीं बना पायेगा जिसका कोई cv 

इकलौती  वोह, मेरी दुनिया वोह 

कुछ ऐसी ही है जी 'मेरी बीवी' 


सुबह चाय के पतीले से बात करती 

कहती उससे जल्दी बन जाना 

नाश्ता टिफ़िन सब का बनाके 

मुझे भी तोह है दफ्तर जाना 

'टाइम्स ऑफ़ इंडिया' क्या पढू जी 

खबरों से भरा वह चलता फिरता  tv 

कुछ ऐसी ही है जी 'मेरी बीवी' 


पार्टी में उन्हें जाना हो जब 

कपड़ो की कंगाली याद आये तब 

"क्या पह्नु जी कुछ समझ नहीं आ रहा 

पुराना  फैशन अब नहीं भा रहा"

तैयार वह हो, तोह सो जाती घडी 

कुछ ऐसी ही है जी 'मेरी बीवी' 


बच्चे की जो परीक्षा आये 

सर पर शिकन उनके भमराये 

बुखार उनका हम पल-पल नापे 

विस्फोट की गूँज से थर-थर काँपे 

परीक्षा नहीं है ये विपदा बड़ी 

कुछ ऐसी ही है जी 'मेरी बीवी' 


चिल्लाती भी वोह , सुनती भी वोह 

किचन में भी वोह, दफ्तर में भी वोह 

मायके तोह हसी ख़ुशी भेज देता 

पर ध्यान तोह वही रखती सबका 

मन न लगे और दिन बन जाए सजा कड़ी 

कुछ ऐसी ही है जी 'मेरी बीवी' 


अरे खुशकिस्मत हु जो उन्हें पाया 

हमसफ़र में ही दोस्त को पाया 

हां, कभी कभी वह बिगड़ जाती है 

जैसे मोटर कोई ख़राब हो जाती है 

जो न आता हमें उनको मानना 

पकवानो के तारीफ के पुल बांधना 

तोह खाते संडे को सिर्फ सलाद ककड़ी 

कुछ ऐसी ही है  जी 'मेरी बीवी'

 

उनके बारे में सुना आपने, आभार 

उन्ही से तोह रोशन है मेरा यह संसार 

कुछ खट्टी, कुछ मीठी इस कवी की आपबीती 

विदा लेता हु आपसे अब, बुला रही वोह  अब 

गरम चाय की प्याली और बातों की लड़ी 

कुछ ऐसी ही है जी   बीवी 'मेरी बीवी'


'नाम गुमनाम ही रहे तोह अच्छा है'




 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

Tuesday, 29 September 2020

Vibha Ke Alfaaz-II

 

Traveling Back to Our Childhood...

कही सुबह का गड-गड कुल्ला 

कही चूड़ी की मीठी खनखन 

कहा गयी वह आवाज़ें 

कहा गया मेरा बचपन?


कंधो पर रहता था बस 

मस्ती से भरा एक बस्ता 

पत्थर के साथ फुटबॉल खेलते 

निकल जाता था पूरा रस्ता 

 घर पहुँचते तोह रोटी की खुशबु 

दिलो-दिमाग को खुश कर देती 

पिता 'नंबर' पूछे उससे पहले 

माँ भरपेट खाना खिलाती 


क़यामत से कितना भी मांगो 

नंबर क्यों आते थे कम?

'बापू को तुम शांत रखना'

कहके माँ को लगते मख्खन 

'बड़े होकर तुम क्या बनोगे?'

होती पिता से यही अनबन 

कहा गयी वह आवाज़ें 

कहा गया मेरा बचपन?


बगल वाली आंटी के घर 

दीवाल कूद कूद कर जाते 

वाह वाह आंटी वाह वाह आंटी कहके 

नए नए पकवान बनवाते 

'चल बदमाश' कहती वह हस के 

खुश होती पर मन ही मन 

कहा गयी वह आवाज़ें 

कहा गया मेरा बचपन?


कभी हेलीकाप्टर कभी लूडो 

तोह कभी ले आते पापा फौजी की गन 

खिलोने से तोह भर जाती टोकरी 

नहीं भरता पर हमारा मन 

सब मिलकर  जाते थे  पिकनिक 

कभी चाट पकोड़ी कभी गार्डन 

अंताक्षरी की महफ़िल लगती 

कभी रम जाते थे भजन 

कहा गयी वह आवाज़ें 

कहा गया मेरा बचपन?


राह देखा करते थे की 

कब आएगी उजली दिवाली 

पापा लाते नए कपडे और पटाखे 

माँ बनाती पेठा और सुहाली 

चहचहाते हुए घर में 

साथ करते पूजा हवन 

कहा गयी वह आवाज़ें 

कहा गया मेरा बचपन?


दादा दादी का लाड था घर में 

सब करते उनको नमन 

मिलकर देखा करते थे संडे की संडे 

महाभारत और रामायण 

 घर का एक सदस्य जो  न भूला 

मेरे आँगन को वह झूला 

सररर सररर जब उचे जाए 

बढ़ जाती माँ की धड़कन  

कहा गयी वह आवाज़ें 

कहा गया मेरा बचपन?


बर्थडे पर होती थी मनुहार 

मिलते थे बोहोत उपहार 

दोस्ती की टोली साथ झूमती गाती 

इठलाते हम यु बनठन 

कहा गयी वह आवाज़ें 

कहा गया मेरा बचपन?


संक्रांति की बात कुछ और 

चाचू लाते पतंग और डोर 

पहुंच जाते छत पर तड़के भोर 

रंग बिरंगी अँखियाँ चारो ओर 

'काई -पो-छे !' की गडगडाहट से 

गूँज उठता था ये गगन 

कहा गयी वह आवाज़ें

 कहा गया मेरा बचपन?


न होता तब मोबाइल 

न होता फेसबुक पे प्रोफाइल 

फिर भी रहती हमेशा 

चेहरे पर प्यारी सी स्माइल 

सस्ती सुन्दर टिकाऊ ज़िन्दगी 

न था ये झमेला कभी 

अरे..... 'वन टू का फोर , फोर टू  का वन '

कहा गयी वह आवाज़ें 

कहा गया मेरा बचपन?

'विभा'

स्पेशल थैंक्स टू योगेश सिंघानिया 




Saturday, 29 August 2020

To Speak is to Let My Voice

 



To speak is  to let my voice
To let my heart, dictate my words;
And tell the difference,
Between wrong and right.
To speak is to let my voice. 


To speak is to let my voice
For whom, I really care;
You may feel it's an objection,
But it is your well-wisher's dare.
To speak is to let my voice. 


To speak is to let my voice
Hey...don't be judgemental!
Yes. I have to be responsible;
But, why only me the 'soul - perfect'?
Don't I have my own self - respect?
To speak is to let my voice.

To speak is to let my voice
If I don't speak, many others will speak;
Words get tossed; truth gets weak,
Don't turn your conscience into a noise
To speak is to let my voice.


Vibha Gupta

Snaptalk Galleria - Social

 

Sometimes words fall short. Let the pictures talk. Connect with you and inspire. 

We would be glad to feature more of such pictures that make a difference and need no further description. Mail us to vibhaguptapro@gmail.com. Featured images will be given picture credit.  


August Galleria








By: Meghan Edwards, United States






Source: Deccan Herald, Edit: Vibha Gupta





Edit: Vibha Gupta

Saturday, 4 July 2020

Thought Strings of July







Here I am...to kick start days of July with thoughts, thoughts and, thoughts! Every day teaches us something new and that makes me zero down to a string of thought...
Let's get indulged!!!!!!

July 1, 2020 💖

"Let the countdown begin, to another month of anticipation, home station, and unlocked nation!"


July 2, 2020 💖

"There is a hell lot of difference between legal and illegal.....and wrong and right....can you get it clear please and stop the fight....?"

July 3, 2020 💖

"What makes an orange, orange, and a blueberry not blue.......?"

July 4, 2020 💖

"The problem with a stupid man.....except him, the whole world knows his problem......"

July 5, 2020 💖

"Need to vent out....but not getting the privacy? Start chopping onions...and take your time..."

July 6,2020 💖

"To 'let-go' is a virtue, not a sacrifice or adjustment. If you do it by force, the virtue disappears, which actually doesn't allows you to .....'let - go'..........."

July7, 2020 💖

" Attachment is the false armor, you think will support you in times of adversity."

July 8,2020 💖

"Sentiments matter not sensitiveness. Sentiments are logical. Sensitiveness is mere emotion riding at that point of time."

July 9, 2020 💖

"Someone's acceptance and rejection should not matter to you unless you are happy with yourself and you are accepting what you are. Thinking bad about self is as good as being the first to reject yourself!"

July 10,2020 💖

"The morning dew touches my feet, as I walk on the grass...and evoke me to the core...."

July 11,2020💖

" The sky can be pink too. If you fix the colors, where is the creativity!"

July 12,2020💖

" Silence is power, only when you use it to calm the situation, but not when you are vulnerable."

July13,2020💖

"Perfection is a myth which we all believe to be true!"

July 14,2020💖

"Selfie selfie on the wall, who is the beautiful of them all! ....Damn the selfie camera on the phone!"

July 15,2020💖

"She is a pedestrian for life, walking through the garbage, and picking valuable things, thrown by us...."

July 16, 2020💖

"Looks are deceptive in the short run. Only thoughts are receptive in the longer run."

July 17,2020💖

"Common sense is not so common. But a common man is. Until....he decides not to!!!"

July 18,2020💖

"It's fair' to conduct online classes, but not so 'lovely' to make a kid understand life on screen!"

July19,2020💖

"Longing is inevitable in a 'long' distance relationship, questioning the longevity of the relationship for long!"

July 20, 2020💖

"It's never late to start, if not the easy way....just kick it! physiology of a moped...physiology of life...."

July'21, 2020💖

" Life is indeed a bed of roses.....but the untrimmed roses....making you 'ouch'  at times!!!"

July'22, 2020💖

"Flaunting ego is as good as gifting a child a toy gift-packed in gold. Who's interested by the way!!!"

July'23, 2020💖

"What an irony! Separation can be a source of both grief and happiness!" 

July'24, 2020💖

"Let education 'enlighten' and not 'tighten' your hold over rank and marks! "

July'25, 2020💖

"Emotions blindfold practicality. "

July'26, 2020💖

"Creativity nourishes the soul."

July'27, 2020💖

"A mother can sound right or wrong at times, but never misguiding."

July'28, 2020💖

"Thoughts evaporate soon...so don't take everything seriously!"

July'29, 2020💖

"Setbacks should not push you to the backseat. Be the driver, strong and determined."

July'30, 2020💖

"Do your best and leave the rest to fall in its places!"

July'31, 2020💖

" July ends but not the thought process. See you soon!"






Saturday, 27 June 2020

Vibha ke Alfaaz - I



Welcome to the Jazbaat - Shayari and Poem Section of WhisperingWoods. Shayari and Poems simple convey the artistic bend of words soaked in emotions and thoughts. They don't have a fixed path....they just flow...straight from the heart....
Feel free to comment or review them. Want to contribute? Reach out to us in the comment section. We would love to feature you and showcase your 'jazbaat' here.

🌺🌺

Muskurahat kisi ki jaagir nahi hoti....
Rone ki fitrat har kisi ki nahi hoti.
Kab tak jamate rahoge ye shikayaton ki mehfil..
Kab tak jamate rahoge ye shikayaton ki mehfil..
Khul kar jee lene ki parwangi nahi hoti.
Par bhool na jaana tum bhi insaan ho...
Kisi ke liye afsos toh kisi ke liye meherban ho.
Hasne aur rone ka tana baana chalta rahega...
Zindagi sir par utha rakhi hai...

Ye toh yu hi chalta rahega ...chalta rahega.



🌺🌺


Muddatein ho gayi...

jaise guzar gaya ho zamana...

Dekha toh tumhe roz karte they, 

par shayad ab tumhe jaana.


Ye baatein aise hi satati rahengi,

 puraani yaadein humein jalati rahengi,
Kuch yaad karke ashq beh na nikle,

 kuch behtar hai yaad na kare warna chubhengi. 


Ab toh woh hi hai jo khairiyat puche, 

kab khatam ho ye "vibha" soche..
Mandir mein bus jise sajaa ke rakh diya, 

hua tumhe ehsaas..jab khud ko bandh kiya. 


Jala do aaj ek diya...lambi fursaton mein..

Kahi toh meherbaan hoga woh tumhari harkarton pe.....
tumhari harkaton pe .......



🌺🌺

Nar ho ya naari hai....ye vipda toh sab pe bhaari hai...
Koshishein bhi jaari hai, mukhote mein duniya saari hai..

'Door raho' yeh kehna...ab aasaan ho gaya..
Chup kar apne aap se hi milna...haalaton ka farmaan ban gaya..

Woh aaine ko dekhna, woh tayyar hokar itra chidakna..
Rozana ka ye drama...ab yaadon ka mohtaj ho gaya..

Dekh rahi hai 'vibha' auro ki tarah..is pure falsafe ko...
Dhundh rahi hai khali basti mein kisi apne ko....kisi apne ko..

🌺🌺

Aankhon mein aansu aur sama hai gamgeen...
Guftagu kya kare, ab shaam kaha haseen.

Uljhano ko suljhate hue nikal jayenge din..
Ab tak toh reh rahe they, thoda aur rehlenge unke bin.

🌺🌺

Hari bhari hai ye roshan wadiyaan...
In waadiyon ki chuppi kuch..
keh rahi hai..
Dhoop mein nahake, apna ujla rang, 
Itra ke jaise bikher rahi hai. 

Inki khubsoorti ka kya kehna,
Ye toh inka haq hai..
Rahe humesha aabad aise hi..
Ye na ho toh jeevan narak hai.

Ae waadiyon.. bus yu sama lo mujhe..
Ki odh lu tumhe,
Aur ban jaaye 'Vibha' tumhari is tarah..
Ki kabhi na bhool paye ye lamhe. 

🌺🌺

Yaado ka Falsafa Baarish ki boondein hai ya yaadon ka falsafa, Bhini mitti ki khushbu, kya raaz hai chupa.. Yaad aayi tumhari jab baadal chaaye.. Baarish hui ...dharti ko pyaar mila Aur main dekhti rahi jharokhe se... Yaado ka falsafa boondo mein simat jaaye Kabhi toh aaoge is baarish ki tarah Surk labon ko hasne ki mil jayegi wajah Jo na aaye .. To dekhti rahungi jharokhe se yu hi.. Ye boondein aur yaadon ka falsafa Baarish toh aayegi aur tham jayegi, Aankhen aur zameen nam ho jayegi...
 
Guzar na jaaye ye mausam jharokhe se hi .. Bheegne ka mauka mil jaye mujhe bhi... Aa jaao ki taak rahi hu rasta tumhara... Shayad na milu agle saal.... Jharokhe pe dobaara.... Mil jaungi mitti mein...tumhare intzar mein.. Tum le aana baarish mere pyar mein.. Mehsus karna mujhe us.... bhini mitti ki khusbu mein... Ban jaungi ye barish ka farmaan Aur tumhari yaadon ka falsafa...

🌺🌺

Patjhad Ka Mausam

Jab din guzarte hai jaise koi patjhad ka mausam, Shaakh ho jaaye bezubaan, aankhen rahe num Padhne lagte hai hum haatho ki woh lakeer Jaise inme hi ho saare chupe raaz aur taqdeer
Intzaar rehta hai ki khatm ho jaaye ye patjhad

Bhar jaaye in bejaan adhoore shaakh ka daaman Phir se guzre haseen lamho se bhara din, Saansein sirf chale na, dobara jeene lage hum. Jeene lage hum. Khatm ho jaaye ye patjhad ka mausam...

🌺🌺



     

                
                  











Saturday, 20 June 2020

Thought Strings




Welcome! Our daily interactions inspire us to zero down on few conclusions for the day. "Thought Strings" is a compilation of these thoughts, served to you as one of the Starters by Vibha. Enjoy and feel free to comment below.
Let the starters, roll the conversation. 


15th June'20

" Were you so weak and vulnerable...... that you  walked away before you talked......"


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16th June'20

"What you find in an organisation characterised by fear management? Mute followers disguised as employers."

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17th June'20

"Emotional Abuse is like that Bus, from which you can't get off even after knowing, it's NOT taking you to your destination."

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18th June'20

"Carve your own identity, before someone else labels you."


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19th June'20
" A solid mentor is like your in-person glasses. He makes the road ahead more clear for you and makes you see what you can't in his absence Your vision is improved."

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20th June'20

"No...no...no! Do really stories have an end? Let us understand that it is just a pause like a page break, and a new beginning of something. 
Next page please........"

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22nd June'20

" Well..in this lock down  period...we both are directionless.
Who? ....Me and my eyebrow."

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23rd June'20
" There is no definition of a mother's excitement. Just admire it!"

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24th June'20
"More than the Covid....we are grappled in the fear of getting it....we can hide behind the masks...not the numbers..they are everywhere..."

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25th June'20
" Deafening silence can be more fatal...than the chaos..."

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26th June'20
" Some people talk very less. But they speak a lot...."

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27th June'20
"When you listen to someone by heart, you not only absorb the words, you absorb  the encompassed meanings with the words.."

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28th June'20
"The most difficult job in this world is to make someone smile.... You know why...because you yourself never had a heart felt smile."

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29th June'20 
" Following others constantly can make you move ahead in the queue but not progress...."

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30th June'20
"The irony is ...... the precursor of all great reforms is an injustice and tyranny somewhere..."

Veerangna Ki Awaaz

  VibzContentCart wishes everyone a very Happy Republic Day! वीरांगना की आवाज़  हम क्या शिकवा करे, क्या मन्नत करें उनसे जो किसी और पर मर मिटे...